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S.NO. NEWS AUTHOR
1 पूर्वांचल में छाई मीठी गोली Through (I-next News Paper, Gorakhpur)
2 भारत में होमियोपैथी का बढ़ता प्रभाव Dr. Anududha Verma, Lucknow
3 Vishva Me Homoeopathy Ki Stithi Dr . Anurudha Verma
4 MILESTONES OF DEVELOPMENT OF HOMOEOPATHY IN INDIA

MILESTONES OF DEVELOPMENT OF HOMOEOPATHY IN INDIA


* 1948: Govt.of India constituted Homoeopathic Enquiry Committee (HEC)
* 1949: Homoeopathic Enquiry Committee report presented, which recommended constitution of Central Homoeopathy Council
* 1954: Homoeopathic Advisory Committee formed at the Centre, which advised the Govt. on all matters pertaining to Homoeopathy including education, research, regulation of practice, pharmacopoeias drug manufacture, hospitals & dispensaries etc.
* 1955: Special postal cancellation on 10th April to commemorate Bicentenary celebration of birth anniversary of Dr. Hahnemann) the father of Homoeopathy
* 1962 : Nomination of Honorary Homoeopathic Adviserto Govt. of India
* 1962: Formation of Indian Homoeopathic Pharmacopoeia Committee
* 1964: Rural Homoeopathic Medical Aid Committee formed
* 1969: Govt. of India established Central Council for Research in Indian Medicine and Homoeopathy (CCRIM & H)
* 1973: Homoeopathic Central Council Act passed in the Parliament.
* 1974: Formation of Central Council of Homoeopathy to regulate Homoeopathic education and practice
* 1977: Hahnemann Stamp released in India
* 1978: CCRIM & H dissolved to form 4 independent research councils, including Central Council for Research in Homoeopathy
* 1995: Department of Indian System Of Medicine and Homoeopathy (ISM&H) formed under Ministry of Health and Family Welfare, Govt. of India.
* 2002 : National Policy on Indian Systems of Medicine and Homoeopathy formulated.
* 2003 : Department of ISM & H renamed as Department of Ayurveda, Siddha, Unani, Yoga & Naturopathy and Homoeopathy (AYUSH)


पूर्वांचल में छाई मीठी गोली


होमियोपैथी की जब भी बात चलती है तो बनर्जी परिवार का नाम जरूर आता है ,१९९० से अब तक बनर्जी परिवार सहरवासियों की सेवा करता आया है चाहे पहले सहर में होमियोपैथी की शुरुआत करने वाले डॉक्टर .अमूल्य रतन बनर्जी या फिर इनके इस काम को आगे बढ़ाकर उचाईयों पर पहुचाने वाले डॉक्टर . हेमंत कुमार बनर्जी और मौजूदा वक़्त में डॉक्टर राम रतन बनर्जी हो या फिर आगे की पीड़ी संभाल रहे , रचना बनर्जी या फिर डॉक्टर रूप कुमार बनर्जी सभी ने कोई दूसरे चैत्र को चुनने की बजाय होमियोपैथी में ही होना कर्रिएर बनाया वह आज भी गोरखपुर के आस पास के लोगो की सेवा में लगे हुए है गोरखपुर में इलाज़ के लिए सबसे सस्ती पद्धति मानी जाने

वाली होमियोपैथी की शुरुआत १९९० में हुई इस दौरान गोरखपुर में डॉक्टर अमूल्य रतन बनर्जी आए ,शुरुआती दिनों में डॉक्टर अमूल्य घर के दालान में ही दरी लगाकर ही मरीजों को देखा करते थे ,वही किसी भी मरीज़ से पैसे नहीं लिया करते थे । हां , जो मरीज ठीक हो जाता था वह खुद ही डॉक्टर साहब के पास साग -सब्जी, दूध वगैरह पंहुचा दिया करते थे । शुरुआती दौर में लोगो को होमियोपैथी से फायदा तो मिलने लगा था ,लेकिन इलाज़ की इस पद्धति पे लोगो को पूरी तरह भरोसा नहीं हुआ ,जिसकी वजह से बड़ी कम तादाद में लोग इलाज़ के लिए आते थे ।इलाज के लिए होमियोपैथी से दूर रहे लोगो को करीब लाने का काम डॉक्टर हेमंत बनर्जी ने किया । १९१३ में पैदा हुए डॉक्टर हे,अंत कुमार बनर्जी की प्राइमरी एजुकेशन गोरखपुर में ही हुई । सेंत एण्ड्रूस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह कोलकाता होमियोपैथी कॉलेज चले गए । वहाँ से उन्होंने होमियोपैथी के गुर सीखे और फिर वापस गोरखपुर को ही सेवा क लिए चुना । यहाँ पर पहुचकर उन्होंने अपनी प्रैक्टिस सुरु कर दी । उनके अंदर देशप्रेम की भावना इस कदर थी की उन्होंने कभी सूट नहीं पहना धोती ,कुरता और सदरी ही हमेशा उनकी पहचान रही ,अपने मरीजों को साफ़ सफाई की सीख देते हुए वे दवाइया दिया करते थे ।इलाज के लिए होमियोपैथी से दूर रहे लोगो को करीब लाने का काम डॉक्टर हेमंत बनर्जी ने किया । १९१३ में पैदा हुए डॉक्टर हे,अंत कुमार बनर्जी की प्राइमरी एजुकेशन गोरखपुर में ही हुई । सेंत एण्ड्रूस कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह कोलकाता होमियोपैथी कॉलेज चले गए । वहाँ से उन्होंने होमियोपैथी के गुर सीखे और फिर वापस गोरखपुर को ही सेवा क लिए चुना । यहाँ पर पहुचकर उन्होंने अपनी प्रैक्टिस सुरु कर दी । उनके अंदर देशप्रेम की भावना इस कदर थी की उन्होंने कभी सूट नहीं पहना धोती ,कुरता और सदरी ही हमेशा उनकी पहचान रही ,अपने मरीजों को साफ़ सफाई की सीख देते हुए वे दवाइया दिया करते थे । डॉक्टर हेमंत कुमार का जलवा सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि विदेशो में भी था ।डॉक्टर हेमंत कुमार बनर्जी की राह पर अब डॉक्टर राम रत्न बनर्जी भी है इनके पास सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि पाकिस्तान ,नेपाल ,बांग्लादेश के भी मरीज उन्हें दिखने के लिए आते है । यह डॉक्टर बनर्जी की ही देन है की ओमान में होमियोपैथी में कस्टम ड्यूटी नहीं लगती हुआ यूँ की ओमान के काजी बहुत गंभीर बिमारी से पीड़ित थे ।उन्होंने डॉक्टर बनर्जी की काफी तारीफ सुन रखी थी जिसके बाद उन्होंने अपना इलाज़ यहाँ करने का फैसला लिया ,इलाज़ से उन्हें इतना फायदा हुआ की उन्होंने ओमान के एयरपोर्ट पे यह आदेश दिया की होमियोपैथी की दवाओं पे कस्टम ड्यूटी न लगाई जाए |



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